Saturday, July 7, 2018
मै एक घर के पास से गुजर रहा था की अचानक से मुझे उस
घर के अन्दर से रोने की आवाज आई|उस बच्चे की आवाज में इतना दर्द था कि अन्दर
जा कर वह बच्चा रो क्यों रहा है,यह मालूम करने के लिए मै खुद को रोक न सका|अंदर जा कर मैंने देखा
की एक माँ अपने लगभग 10 के बच्चे को अहिस्ता-अहिस्ता मारती और बच्चे के साथ खुद भी
रोने लगती|मैंने आगे बढ़कर पूछा की बहन जी आप इस छोटे से बच्चे को क्यों मर रही है? जबकि मारने के बाद
आप खुद भी रोने लगती है|उसने जवाब दिया भाई साहब इसके पिता जी भगवान् को प्यारे हो गए ह और हम लोग
बहुत गरीब है,उनके जाने के बाद मै लोगों के घरों में करके घर और इन बच्चो की पढ़ाई का खर्च
बहुत मुस्किल से उठाती हूँ और यह रोज घर देर से आता है|जाते हुए रास्ते में
खेल में लग जाता है स्कूल ली वर्दी भी रोज गन्दी कर लाता है|तभी मै वहा से वापस
आ गया|
एक दिन मै किसी काम से बाजार गया हुआ था तभी मैंने
उसी लडके को देखा की वह लड़का बाजार में जब कोई दुकानदार किसी को कोई सब्जी बेचता है
तो वह उनसे अपनी बोरी में डालने से जो जमीन पर गिर जाती है वह उसे उठाकर अपनी झोली
में डाल लेता है और फिर थोड़ी सब्जी हो जाने बाद वह बाजार में एक छोटी सी दुकान लगा कर उस सब्जी को बेचा और सब्जी बेचने
के बाद वह एक कपडे की दुकान में गया और सब्जी बेचने के द्वारा जो पैसे कमाए थे वह पैसे
उसने कपडे वाले को दिए और उससे बैग वापस लेकर अपने स्कूल की तरफ गया उसकी स्कूल की
वर्दी भी गन्दी हो चुकी थी उसके हाँथ भी गंदे थे उसने और वह स्कूल जाते हुए रास्ते
में हाँथ धुले और स्कूल पहुंचा जैसे ही वह स्कूल पंहुचा उसने बैग रखा और अपने दोनों
हाँथ फैला कर खड़ा हो और मास्टर साहब आकर उसे मरने लगे तभी मैंने उनसे कहा की आप इसे
क्यों मार रहे है तो उन्हों ने जवाब दिया की यह रोज स्कूल देरी से आता है कई बार हमने
इसकी शिकायत इसके घर पर भी की है और मैंने उनसे उनका फोन न.लिया और वहा से चला गया|
दूसरे दिन
मैंने सुबह ही उस अध्यापक को फोन पर जल्दी से बाजार आने को कहा और उसके घर से उसकी
माँ को भी बाजार ले आया मैं तीनो छुप करके उस बच्चे को देखने लगे और मैंने सभी ने देखा
की वह बच्चा दूसरे दुकान दारों द्वारा गिरी हुई सब्जी उठाकर अपनी झोली में डाल लेता
है यह सब देखकर सभी की आँखे नम हो रही थी लेकिन अपने आप को सभी ने रोका और आगे बढे
फिर देखा की वह एक दुकान के सामने अपनी छोटी सी दुकान लगाई और ऊँची ऊँची आवाजो में
सब्जी बेचने लगा तभी एक दुकानदार आया और उसकी दुकान में लत मार कर उसकी सारी सब्जी
सड़क पर फैला दी और वहा से चला गया तभी वह रोते हुए अपनी सब्जी उठाई और दूसरी दुकान
के सामने अपनी दूकान लगा ली|और सब्जी बेचने के बाद रोजाना की तरह वह फिर
कपडे की दुकान पर गया और कपडे वाले को पैसे दिए और अपना बैग वापस लेने के कहा तो कपडे
वाले ने पैसे और बैग दोनों वापस कर दिए और एक कुर्ता का कपडा देते हुए कहा बीटा इस
कपडे के पैसे पूरे हो चुके है ये लो|
आज भी वह रोज की तरह स्कूल के लिए लेट हो गया था
रास्ते में हाँथ धुला और स्कूल पहुंचा और बैग रख कर दोनों हाँथ फैला कर खड़ा हो गया
तभी अध्यापक ने दौड़कर उसको अपनी गोदी में उठा लिया और रोने लगा तो मुझसे भी नहीं रहा
गया और मै भी वहीँ पर पहुंचा फिर उस बच्चे से पूंचा किआ आप इस कपडे का क्या करो गे
तो उसने हैरानी वाला जवाब दिया की इस कपडे का मै अपनी माँ के लिए कुर्ता बनवाऊगा क्यों
की मेरी माँ दुसरों के घरों में काम करने जाती है तो उनका कुर्ता फट गया है इस लिए
मैंने यह लिया है
टीचर और मै सोंच कर रोते जा रहे थे कि आखिर कब तक हमारे
समाज में गरीबों के साथ ऐसा होता रहेगा उनके बच्चे त्योहारों की खुशियों में शामिल
होने के लिए जलते रहेंगे आखिर कब तक|क्या ऊपर वाले की खुशियों में इन जैसे गरीब का
कोई हक़ नहीं? क्या हम अपनी खुशियों के मौके पर अपनी ख्वाहिशों में से थोड़े से पैसे
निकाल कर अपने समाज में मौजूद गरीब और बेसहारों की मदद नहीं कर सकते|
आप सब भी ठंडे दिमाग से एक बार जरुर सोचना !!!!
अगर हो सके तो इस लेख को उन सभी सक्षम लोगों को बताना
ताकि हमारी इस छोटी सी कोशिश से किसी भी सक्षम के दिल में गरीबों के प्रति हमदर्दी
का जज्बा ही जग जाये और किसी गरीब के घर की खुशियों की वजह बन जाये|
किसी पेड़ के काटने का आज
यूँ किस्सा नहीं होता अगर
कुल्हाड़ी के पीछे लकड़ी का
हिस्सा नहीं होता,
यूँ तो लोहे को लोहा ही काटने में
लोहा ही साथ देता है;
किसी अपने को बर्बाद करने में
किसी अपने ही हाथ होता है.
मेरे कफन में जेब न थी
ऐसा होगा जब नियत जिसकी खराब होगी
उसके कफन में जेब जरूर होगी
उसके कर्म और अधर्म जमीं पर दिखाई देंगे
क्योंकि उसका कफन मयूर की गवाही देंगे
ले जयेगा अपने साथ वो सब कुछ
क्योंकि उसकी कमाई का इस धरती पर बोझ न होगा
वो बंदिशे वो नफ़रतें वो जुल्म न होंगे
क्योंकि उसका इस धरती पर कोई निशान न होगा
न गम होगा न गमगीन कोई होगा
क्योंकि अब हर बुरा इंशा जमीदोज होगा
चले जाते थे जो मुस्कराते हुए उनकी चौखट पर
उनकी इस मुस्कराहट का कोई चश्मदीद न होगा
वो बस्तिया वो महल वो राजवाड़े
अब कोई न बचा पायेगा किसी बहाने
खुश है हम कि ईमानदारी हमे विरासत में मिली
इसलिए ही हमारी जिंदगी दूसरों से ज्यादा चली
हसरते हमारी भी थी राजे राजवाड़े की
लेकिन याद आती थी माँ बाप के मेहनतकश पख्वारो की
न चीखती थी न चिल्लाती थी वो तो हर गम में मुस्कराती थी
उसकी नसीहते उसकी कहानिया और इबादते ही थी
कि मेरे मरने के बाद मेरेकफन में जेब न थी
Thursday, July 5, 2018
एक दिन उम्र ने तलाशी ली,
तो जेब से लम्हे बरामद हुए
कुछ गम के थे,_
कुछ नम से थे,_
कुछ टूटे हुए थे,_
जो सही सलामत मिले...
वो बचपन के थे...!!!
" बचपन "कितना खूबसूरत था,
तब "खिलौने जिन्दगी" थे
आज "जिन्दगी खिलौना "है.
तो जेब से लम्हे बरामद हुए
कुछ गम के थे,_
कुछ नम से थे,_
कुछ टूटे हुए थे,_
जो सही सलामत मिले...
वो बचपन के थे...!!!
" बचपन "कितना खूबसूरत था,
तब "खिलौने जिन्दगी" थे
आज "जिन्दगी खिलौना "है.
मंजिल यूँ नहीं मिलती
राही को
जुनून सा दिल में जगाना
पड़ता है,
पूछा चिड़िया से कि घोसला
कैसे बनता है
वो बोली कि तिनका-तिनका
उठाना पड़ता है.
उम्र की राह में इन्सान बदल जाता है,
वक्त की आंधी में तूफान बदल जाता है,
सोचता हूँ तुम्हे परेसान ना करूँ,
पर क्या करूँ बाद में इरादा बदल जाता है.
बहुत उदास है कोई तेरे चले जाने से,
हो सके तो लौट आना किसी बहाने से|
तू लाख खफा सही मगर एकबार तो,
देख कोई टूट गया है तेरे रूठ जाने से|
Tuesday, May 15, 2018
जब आंख खुली तो अम्मा की
उसका नन्हा सा अंचल मुझको
भूमंडल से प्यारा था
उसके चेहरे की झलक देख
उसके स्तन की एक बूंद से
मुझको जीवन मिलता था
हांथो से बालों को नोचा
पैरों से खूब प्रहार किया
फिर भी उस माँ ने पुचकारा
हमको जी भर के प्यार किया
मैं उसका राजा बेटा था
वो आंख का तारा कहती थी
मैं बुढ़ापे में उसका
बस एक सहारा कहती थी
ऊँगली पकड़ चलाया था
पढने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानी को भी निज
अंतर में सदा सहेजा था
मेरे सारे प्रश्नों का वो
फ़ौरन जवाब बन जाती थी
मेरी राहों के कांटे चुन
वो खुद गुलाब बन जाती थी
एक रोग प्यार प्यार ले आया
जिस दिल में माँ की मूरत थी
वो रामकली को दे आया
अपने रिश्तों में झूल गया
अब करवाचौथ मनाता हूँ
माँ की ममता ममता को भूल गया
हम भूल गए उसकी ममता
मेरे जीवन की थाती थी
हम भूल गए अपना जीवन
वो अमृत वाली छाती थी
हम भूल गए वो खुद भूखी
रह करके हमें खिलाती थी
हमको सूखा बिस्तर देती थी
खुद गीले में सो जाती थी
हम भूल गए उसने ही
होंठो को भाषा सिखलायी थी
मेरी नींदों के लिए रात भर
उसने लोरी गाई थी
हम भूल गये हर गलती पर
उसने डाटा समझाया था
ताकि बचूं बुरी नजर से
काला टीका सदा लगाया था
हम बड़े हुए तो ममता वाले
सारे बंधन तोड़ आये
बंगले में कुत्ते पाल लिए
माँ को वर्द्धाआश्रम में छोड़ आये
उसके सपनो का महल गिरा कर
कंकर-कंकर बिन लिए
खुदगर्जी में उसके सुहाग के
आभूषण तक छीन लिए
हम माँ को घर के बटवारे की
अभिलाषा तक ले आये
उसको पावन मंदिर से
गली की भाषा तक ले आये
माँ की ममता को देख मौत भी
आगे से हट जाती है
अगर माँ अपमानित होती है
धरती की छाती फट जाती है
घर को पूरा जीवन देकर
बेचारी माँ क्या पाती है
रुखा सुखा खा लेती लेती है
पानी पि कर सो जाती है
जो माँ जैसी देवी घर के
मंदिर में नहीं रख सकते है
वो लाखों पुण्य भले कर लें
इन्सान नहीं बन सकते है
माँ जिसको भी जल दे दे
वो पौधा संदल बन जाता है
माँ के चरणों को छु कर पानी
भी गंगाजल बन जाता है
भगवानो को पाला है
माँ के चरणों में जन्नत है
गिरिजाघर और शिवाला है
हर घर में माँ की पूजा हो
एसा संकल्प उठाता हूँ
मई दुनिया की हर माँ के
चरणों में शीश झुकाता हूँ.
Shyamesh kushwaha
Thursday, May 10, 2018
उम्र में चाहे कोई बड़ा हो या छोटा
हो,लेकिन
वास्तव में बड़ा तो वही है,जिसके दिल
में सबके लिए प्रेम,
स्नेह और सम्मान की भावना हो.
श्यामेश कुशवाहा
एक इन्सान कि सब कुछ
कापी कर सकता है,
कापी कर सकता है,
पर किसी का भाग्य और
नसीब नहीं ...!!
''एक उम्र गुस्ताखियों
के लिए भी होनी चाहिए
ये
कमबख्त जिन्दगी तो बस अदब और लिहाज में ही गुजर गई ''
''इत्तफाक से तो नहीं
टकराये हम तुम ऐ दोस्त
कुछ ख्वाहिश तो खुदा की भी होगी''
श्यामेश कुशवाहा




