''एक उम्र गुस्ताखियों
के लिए भी होनी चाहिए
ये
कमबख्त जिन्दगी तो बस अदब और लिहाज में ही गुजर गई ''
''इत्तफाक से तो नहीं
टकराये हम तुम ऐ दोस्त
कुछ ख्वाहिश तो खुदा की भी होगी''
श्यामेश कुशवाहा

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